जन्माष्टमी : श्रीकृष्ण चेतना का अर्थ
उपासना का स्वरूप और भाव की एक ऐसी संयुक्त है, जिसमें सर्वशक्तिमान का सर्वकालिक स्वरूप अभिन्न हो जाता है। भक्त और आराध्य के भेद की लय अवस्था। स्वयं श्रीकृष्ण कहते हैं – ‘जो तुम हो वही मैं हूं यथा दुग्ध में श्वेत, अग्नि में दाहक शक्ति, पृथ्वी में गन्ध वैसे ही ‘मैं’ निरन्तर तुम में…
